तुलसी कौन थी?

Mantra

Basil should live by this mantra in mind -

Divine Twain Nirmita Purwmrcitasi Munishhwaraः
Namo Hello everyone Hripriye Papan basil ..

इस मंत्र द्वारा तुलसी जी का ध्यान करना चाहिए -

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

Vidhi

Who was Basil?

Basil (plant) in a previous life was a girl whose name was Brenda, the monster was born in the childhood of Lord Vishnu devotee Thykbre love to serve God, pray so she grew you.was he is married to the monster in Jalandhar became demon rule. Jalandhar was born from the sea.
Brenda was very devoted to her husband only ever used to serve her husband.
When gods and demons once fought at Jalandhar Karat said the war was going on -
Going to war is the owner will continue to fight you until you sit in the worship ritual Krugi to win, and until you come back, I pledge
Codugi not. Jalandhar then went to war, and Brenda sat in the fast resolution of the worship, the God of the effects of their vow not to Jalandhar win, all suffered defeats the god Vishnu when approached.

Everyone prayed to God, saying that God - in Vrinda is my devotee can not betrayed her.
Then God said - there is simply no other way to God so that you can help us.

God has a form of Jalandhar like Brenda went to the castle Pahuc
Vrinda saw only her husband, she immediately got up and out of worship to touch his feet, such as broken his resolution, the Jalandhar killed in the war gods and cut his head separated from his head Vrinda Palace Drop in when Brenda saw that my husband's head is cut off, then they had to stand in front of me who he is?

He Puँchha - you know who has the touch, I, your Lord has come as something they could not speak, Brinda understood the whole point, he gave God curse you get to the stone, and God immediately became stone .

Laxmi began to cry all the gods wept and prayed Minister Yab Brinda turned back to God so they took her husband's head
Sati said.

The plant was one of his ashes
Lord Vishnu said to -Today
His name is Basil, and I will remain as a form of the stone from which the name of Tulsi Shaligram will live and worship as well as in
Basil live without enjoyment
Kruga not accepted. All that began to lead worship and basil. Tulsi Shaligram married and living with living in Kartik
Tulsi Vivah Hakdev-Utavni Ekadasi is celebrated as the day it is!

तुलसी कौन थी?

तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.
वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.
एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा -
स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प
नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।

सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।
फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।

भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे
ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?

उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।

सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे
सती हो गयी।

उनकी राख से एक पौधा निकला तब
भगवान विष्णु जी ने कहा आज से
इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में
बिना तुलसी जी के भोग
स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में
किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !