भगवान शिव के एक पुत्री भी है

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According to folk beliefs prevalent afresh once mother Parvati (to fulfill the desires of all the trees) to ask for the gift of your receipt for the week, which consequently led to a daughter. The daughter's name was ashokasundari. Later kings of the earth Nahusha ashokasundari was married, the marriage as a result of ashokasundari Yayati the brave sons and daughters gave birth to Rupwati hundred.
Ashokasundari addition to all other members of the family Shiva are worshiped as gods, and all the major roles. Lord Shiva where a Kalswrup assume God Almighty, has been compared to the mother Goddess Parvati Jagtjnni. His elder son is the captain of the gods. Similarly, before any auspicious Ganesh is worshiped.
Ashokasundari Padma Purana story of the birth of the King's character is described in the description of Nahusha unit. Once the request to bring the most beautiful gardens in the world by Goddess Parvati, Lord Shiva Parvati Nandanvan took from there attachment to mother, afresh and he took that tree. Kalpvriksha wishes to complete the tree, Parvati released to overcome his loneliness from the tree asked the boon that they get a week, then the ashokasundari born afresh. Mother Parvati was released that his marriage blessed damsel Uvk Devraj Indra all powerful will. Once ashokasundari Nandanvan move in with her maids when there were monster called Hund's entry was fascinated by the beauty of the ashokasundari and proposed marriage, he had long said that in the future in terms of a pre-marriage . Then he released the monster will kill Nhus ashokasundari Nhus his death at the hands of a monster that will be cursed. That monster was released the kidnapped Nahusha Nhus rescued by a slave of the Hund. Sage Vasishta and going forward, he grew up in the grotto Nhus Hund killed.

प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार एक बार मां पार्वती ने कल्पवृक्ष (सबकी इच्छाएं पूरी करने वाला वृक्ष) से अपने लिए कन्या प्राप्ति का वरदान मांगा, जिसके फलस्वरूप उन्हें एक पुत्री प्राप्त हुई। इस पुत्री का नाम अशोक सुंदरी रखा गया। कालान्तर में अशोक सुंदरी का विवाह पृथ्वी के राजा नहुष से हुआ, इस विवाह के फलस्वरूप अशोक सुंदरी ने ययाति जैसे वीर पुत्र तथा सौ रुपवती कन्याओं को जन्म दिया।

अशोक सुंदरी के अतिरिक्त शिव परिवार के अन्य सभी सदस्य देवताओं के रूप में पूजे जाते हैं तथा सभी को प्रमुख पद प्राप्त है। भगवान शिव को जहां एक कालस्वरूप मान कर सर्वशक्तिमान ईश्वर है, वहीं मां पार्वती को जगतजननी आदिशक्ति की उपमा दी गई है। उनके बड़े पुत्र कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं। इसी प्रकार किसी भी शुभ कार्य के पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
अशोक सुंदरी के जन्म की कथा पद्म पुराण में बताई गई है जो नहुष नामक राजा के चरित्र वर्णन की इकाई है। एक बार माता पार्वती द्वारा विश्व में सबसे सुंदर उद्यान लाने के आग्रह से भगवान शिव पार्वती को नंदनवन ले गये, वहाँ माता को कल्पवृक्ष से लगाव हो और उन्होने उस वृक्ष को ले लिया। कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष है, पार्वती नें अपने अकेलेपन को दूर करने हेतु उस वृक्ष से यह वर माँगा कि उन्हे एक कन्या प्राप्त हो, तब कल्पवृक्ष द्वारा अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। माता पार्वती नें उस कन्या को वरदान दिया कि उसका विवाह देवराज इंद्र जितने शक्तिशाली यूवक से होगा। एक बार अशोक सुंदरी अपने दासियों के संग नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहाँ हुंड नामक राक्षस का प्रवेश हुआ जो अशोक सुंदरी के सुंदरता से मोहित हो गया तथा विवाह का प्रस्ताव किया, तब उस कन्या ने भविष्य में उसके पूर्वनियत विवाह के संदर्भ में बताया। राक्षस नें कहा कि वह नहूष को मार डालेगा तब अशोक सुंदरी ने राक्षस को श्राप दिया कि उसकी मृत्यु नहूष के हाथों होगी। उस राक्षस नें नहुष का अपहरण कर लिया जिससे नहूष को हुंड की एक दासी ने बचाया। महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में नहूष बड़ा हुआ तथा आगे जाकर उसने हुंड का वध किया।