महाकाली शमशानवासिनी

Mantra

ॐ क्रीं शमशानवासिने भूतादिपलायन कुरु कुरु नमः

Vidhi

साधक को अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. हमेशा लोक हित तथा लोक कल्याण के कार्य में रत साधक को देवी किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने देती.
साधक यह प्रयोग कृष्ण पक्ष की अष्टमी या किसी भी रविवार को शुरू करे. समय रात्रि में १० बजे के बाद का रहे.
साधक के लिए यह उत्तम है की वह शमशान में जा कर यह प्रयोग करे लेकिन अगर यह संभव न हो तो साधक इसे घर पर भी सम्प्पन कर सकता है. अगर शमशान में यह प्रयोग करना हो तो साधक को पूर्ण रक्षा विधान आदि प्रक्रियाओ की पूर्ण समज ले कर ही यह प्रयोग शमशान में करना चाहिए.
साधक रात्रि में स्नान से निवृत हो कर, लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर बैठ जाए. साधक का मुख उत्तर की तरफ ही होना चाहिए.
इसके बाद साधक सदगुरुदेव, गणपति, भैरव पूजन सम्प्पन करे, तथा महाकाली का यन्त्र या विग्रह अपने सामने रखे. और पूजन करे. पूजन में जो दीपक रहे वह चार मुख वाला हो. यह दीपक आटे से भी बनाया जा सकता है.
साधक न्यास आदि प्रक्रिया को कर देवी शमशानकाली का ध्यान करे. तथा उसके बाद साधक मूल मन्त्र का जाप करे.
साधक को निम्न मन्त्र की ५१ माला मंत्र जाप करना है. साधक २१ माला के बाद थोड़ी देर विश्राम ले सकता है. साधक को रुद्राक्ष माला का प्रयोग करना चाहिए. यह क्रम साधक को ३ दिन करना चाहिए. ३ दिन पूर्ण होने पर साधक माला को शमशान में फेंक दे.